प्रसव (लेबर) के मुख्य चरण और उनकी प्रक्रिया
गर्भावस्था के सफर में प्रसव यानी लेबर सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम पड़ाव होता है। हर महिला के लिए यह अनुभव अलग हो सकता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में प्रसव की पूरी प्रक्रिया को मुख्य रूप से तीन चरणों (stages) में बांटा गया है। इन चरणों को समझकर होने वाली मां अपने आने वाले शिशु के जन्म के लिए खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार कर सकती है।
पहला चरण: संकुचन और गर्भाशय ग्रीवा का खुलना
यह प्रसव का सबसे लंबा चरण होता है। इसमें गर्भाशय में नियमित संकुचन (contractions) शुरू होते हैं, जिससे गर्भाशय ग्रीवा (cervix) धीरे-धीरे पतली होती है और १० सेंटीमीटर तक खुल जाती है। इस चरण को भी तीन उप-चरणों—शुरुआती, सक्रिय और संक्रमण (transition) काल में विभाजित किया जाता है। इसमें पीठ और पेट में तेज दर्द महसूस होता है।
दूसरा चरण: शिशु का जन्म
जब गर्भाशय ग्रीवा पूरी तरह खुल जाती है, तब प्रसव का दूसरा चरण शुरू होता है। इस चरण में मां को बच्चे को बाहर धकेलने (push) की तीव्र इच्छा होती है। डॉक्टर या मिडवाइफ के दिशा-निर्देशों के अनुसार जोर लगाने पर शिशु जन्म नाली से होते हुए इस दुनिया में कदम रखता है। शिशु के जन्म लेते ही यह चरण समाप्त हो जाता है।
तीसरा चरण: प्लेसेंटा (गर्भनाल) का बाहर आना
शिशु के जन्म के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती। तीसरे और अंतिम चरण में, गर्भाशय हल्के संकुचनों के माध्यम से प्लेसेंटा (Placenta) को शरीर से बाहर निकालता है। इसमें आमतौर पर ५ से ३० मिनट का समय लगता है। इसके बाद डॉक्टर मां की जांच करते हैं और प्रसव की प्रक्रिया पूरी तरह संपन्न हो जाती है।
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