हॉकी के जनक: जयपाल सिंह मुंडा

जब भी हम हॉकी की बात करते हैं, तो एक नाम खास तौर पर याद आता है – जयपाल सिंह मुंडा। उन्हें भारतीय हॉकी का जनक माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस महान खिलाड़ी का उचित सम्मान आज तक नहीं हुआ?

जयपाल सिंह मुंडा सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे। वे एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने हॉकी को एक राष्ट्रीय गौरव बनाने के लिए संघर्ष किया। वर्ष 1928 में एम्स्टरडैम ओलंपिक में भारत ने पहली बार स्वर्ण पदक जीता, लेकिन उसके पीछे जयपाल की अहम भूमिका थी। वे खुद 1928 की टीम के कप्तान थे और उन्होंने ही भारतीय हॉकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

लेकिन आज भी, उनके योगदान को वैसा सम्मान नहीं मिला जैसा होना चाहिए। कई बार लोग उन्हें भूल जाते हैं। उनके नाम पर स्टेडियम, स्मारक या राष्ट्रीय सम्मान जैसी मांगें कई सालों से उठ रही हैं, लेकिन अभी तक कुछ खास नहीं हुआ।

हॉकी सिर्फ एक खेल नहीं

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