क्या भगवान सबकी सुनते हैं?
इस सवाल के जवाब में एक सच्चाई छिपी है — हाँ, भगवान सबकी सुनते हैं। लेकिन यह सुनना उस तरह नहीं है जैसे हम कानों से किसी की बात सुनते हैं। भगवान निराकार हैं, उनका कोई शरीर नहीं है, फिर भी हम अपनी समझ के अनुसार उन्हें मानव रूप में देखते और समझते हैं।
हम सब एक हैं — यही सच्चाई है।जब कोई व्यक्ति प्रार्थना करता है, तब वह सिर्फ आवाज़ नहीं बढ़ा रहा होता, बल्कि अपने भीतर की आत्मा की आवाज़ सुन रहा होता है। भगवान उस आत्मा के ही अंश हैं। इसलिए कहा गया है कि वह सबकी सुनते हैं — क्योंकि वह हम ही हैं, हम वही हैं।
हम अक्सर सोचते हैं कि प्रार्थना के बाद कुछ चमत्कार होगा, लेकिन सच तो यह है कि भगवान की कृपा हमारे भीतर की शांति, साहस और समझ में छिपी है। जब हम विश्वास करते हैं, तभी हम उनकी आवाज़ सुन पाते हैं।
भगवान के लिए कोई अलग नहीं है। हर दुआ, हर रोने की आवाज़, हर खुशी का गीत — सब कुछ उस एक सत्य में समाया है। बस ज़रूरत है तो सुन
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