संतोष ही सबसे बड़ा सुख है

जीवन में हर इंसान सुख की तलाश में रहता है। कोई पैसा कमाने में, कोई नौकरी में सफलता पाकर, तो कोई परिवार के साथ समय बिताकर खुशी खोजता है। लेकिन सच्चा सुख कहाँ छिपा है? इसका जवाब एक सरल शब्द में छिपा है—संतोष

9 मई, 2012 को एक बातचीत में कहा गया था कि संतोष ही दुनिया का सबसे बड़ा सुख है। चाहे जितनी भी धन-संपत्ति मिल जाए, उसमें खुश रहना और उसका सदुपयोग करना ही जीवन की सबसे बड़ी कला है। जो व्यक्ति अपने हिसाब से जीता है, वह कभी भी असंतुष्ट नहीं रहता।

एक गरीब व्यक्ति भी संतोष के कारण अमीर बन सकता है, लेकिन एक अमीर आदमी लालच के कारण भीख माँगने जैसा महसूस कर सकता है। संतोष का मतलब यह नहीं कि हम कुछ न करें, बल्कि इसका अर्थ है—जो मिला है, उसकी कद्र करना और उसे सही तरीके से इस्तेमाल करना।

जब दिल में शांति हो, तो फिर बाहर की भौतिक चीजें क्या मायने रखती हैं? संतोष वह चिंगारी है जो छोटी सी जगह में भी रोशनी भर देती है। इसल

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