बौद्ध धर्म के पतन के कारण
बौद्ध धर्म एक समय भारत सहित एशिया के कई हिस्सों में बहुत प्रभावशाली था, लेकिन कालांतर में इसका प्रभाव काफी कम हो गया। इस पतन के पीछे कई कारण हैं, जिनमें दो प्रमुख हैं।
पहला कारण बौद्ध समुदाय का महायान और हीनयान में विभाजन था। मूल रूप से बौद्ध धर्म सादगी, त्याग और आत्म-अनुशासन पर आधारित था, लेकिन समय के साथ विचारों में अंतर आया। महायान धर्म में बोधिसत्त्वों की पूजा और अधिक धार्मिक अनुष्ठानों को स्थान मिला, जबकि हीनयान अपने मूल सिद्धांतों पर टिका रहा। इस आंतरिक विभाजन ने समुदाय में एकता को कमजोर किया।
दूसरा महत्वपूर्ण कारण संघ में आए भ्रष्टाचार का था। मूल रूप से भिक्षु और नन भिक्षा मांगकर सादा जीवन जीते थे, लेकिन बाद में कई भिक्षुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पद्धतियों और चमत्कारों के नाम पर लोगों से धन एकत्र करना शुरू कर दिया। इससे धर्म की छवि खराब हुई और आम जनता में इसके प्रति विश्वास कम होने लगा।
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