नमक सत्याग्रह: एक ऐतिहासिक प्रतिरोध
महात्मा गांधी ने 1930 में नमक सत्याग्रह की शुरुआत की, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक मील का पत्थर साबित हुआ। अंग्रेज सरकार ने नमक पर अपना एकाधिकार बनाए रखा था और आम जनता पर इसके उत्पादन और बिक्री को लेकर कड़े कानून लागू किए थे। गांधी जी ने इस कानून को अन्यायपूर्ण माना और लोगों को समुद्र तट पर जाकर स्वयं नमक बनाने की प्रेरणा दी।
इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत 12 मार्च, 1930 को दांडी तट तक 240 मील की पैदल यात्रा के रूप में हुई। हजारों भारतीयों ने इसमें भाग लिया। गांधी जी ने जब समुद्र के किनारे रेत से नमक निकाला, तो यह एक छोटी सी क्रिया थी, लेकिन इसका संदेश बहुत बड़ा था – अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध.
इस आंदोलन ने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी। सरकार ने जवाब में करीब 80,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन डर नहीं फैला। बल्कि, लोग और भी संगठित हो गए। नमक सत्याग्रह सिर्फ नमक के
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