क्या पाकिस्तान में सिक्के पूरी तरह बंद हैं?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में सिक्के पूरी तरह से बैन यानी बंद हो चुके हैं? इस बात को सही तरीके से समझने के लिए हमें वहां के सिक्कों के इतिहास और हालिया बदलावों को देखना होगा।

वैश्विक दशमलव प्रणाली को अपनाते हुए पाकिस्तान ने 1 जनवरी 1961 को दशमलव सिक्कों की शुरुआत की थी। इसके तहत एक रुपये को 'पैसों' में विभाजित किया गया था। शुरुआती दौर में यानी साल 1961 में 1, 5 और 10 पैसे के सिक्के बाजार में उतारे गए। इसके बाद साल 1963 में 25 और 50 पैसे के सिक्के भी चलन में आए, जो लंबे समय तक आम जनता के बीच लेन-देन का जरिया बने रहे।

समय के साथ महंगाई बढ़ने और पैसों की कीमत कम होने के कारण इन छोटे सिक्कों की उपयोगिता खत्म होने लगी। इसी वजह से स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 1 अक्टूबर 2014 से इन सभी दशमलव सिक्कों (पैसे वाले सिक्कों) को पूरी तरह से विमुद्रीकृत (demonetized) यानी बंद कर दिया।

हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पाकिस्तान में सिक्के पूरी तरह बैन हैं। वर्तमान में वहां 1, 2, 5 और 10 रुपये के सिक्के चलन में हैं और वे कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य हैं। केवल पैसे मूल्य वर्ग के छोटे सिक्के अब इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं और कानूनी निविदा (legal tender) नहीं रहे।

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