बिहार: शिक्षा के मामले में पिछड़ा क्यों?

बिहार भारत के उन राज्यों में से एक है जहाँ शिक्षा का स्तर अभी भी चिंताजनक है। एक महत्वपूर्ण कारण है – छात्र-शिक्षक अनुपात का बेहद खराब होना। 11वीं और 12वीं कक्षा के 52 लाख छात्रों के लिए यहाँ केवल 30,000 शिक्षक हैं। इसका मतलब है कि लगभग 173 छात्रों पर मात्र एक शिक्षक

इस स्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना लगभग असंभव है। जब एक शिक्षक को इतने बड़े छात्र द्रव्यमान को पढ़ाना होता है, तो व्यक्तिगत ध्यान देना मुश्किल हो जाता है। नतीजा साफ है – छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है, अधिकांश छात्र पढ़ाई छोड़ देते हैं या बेहतर अंक नहीं ला पाते।

इसके अलावा, बिहार देश में साक्षरता दर के हिसाब से सबसे नीचे के पायदान पर है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की भी ठीक से व्यवस्था नहीं है। कई जगह भवन तो हैं, लेकिन शिक्षक नहीं। कहीं-कहीं तो शिक्षक भी हैं, लेकिन कक्षाएँ नहीं चल पातीं।

हालाँकि, धीरे-

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