मँझली बहू की हँसी: जब हँसी ने ली जान!

क्या आपने कभी सुना है कि हँसी के मारे कोई मर भी सकता है? लगता है मज़ाक है, लेकिन इस मज़ाक के पीछे एक पूरा घरेलू रंग है। बात ये है कि हँसी के मारे मर जाने की बात कौन कहता है—इस सवाल का जवाब छिपा है घर के एक कोने में, जहाँ मँझली बहू बैठकर सबको हँसाती है।

मँझली बहू ही कहती है कि “हँसी के मारे मर जाऊंगी!”

ये बात न तो किसी किताब में लिखी है, न ही डॉक्टर ने बताई। ये तो घर की छोटी-मोटी बातचीत का हिस्सा है। जब कोई बात इतनी मज़ेदार हो जाए कि पेट दुखने लगे, सांस लेने में तकलीफ हो, तो मँझली बहू दोनों हाथ पेट पर रखकर बोल उठती हैं—“अरे भगवान, हँसी के मारे मर जाऊंगी!”

ये कहने का अंदाज़ भी ऐसा होता है कि फिर सब हँसी पर हँसने लगते हैं। ऐसा लगता है मानो हँसी एक संक्रामक बीमारी हो, और मँझली बहू उसकी पहली मरीज़ भी और डॉक्टर भी।

हालांकि वैज्ञानिक तौर पर हँसी से मौत होना लगभग असंभव है, लेकिन जब तक घर

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