भारत और अमेरिका में चीनी खाद्य पदार्थों की पैठ: कितनी सच्चाई, कितना भ्रम?
आज के वैश्विक बाजार में यह सवाल अक्सर उठता है कि हम रोजाना जो खाना खाते हैं, उसमें से कितना हिस्सा दूसरे देशों से आता है। विशेष रूप से चीन जैसे बड़े उत्पादक देश को लेकर कई तरह की बातें होती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिकी खाद्य आपूर्ति का 1 प्रतिशत से भी कम हिस्सा चीन से आयात किया जाता है?
हालांकि यह आंकड़ा बहुत छोटा लगता है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जब हम कुल खाद्य आपूर्ति की बात करते हैं, तो समग्र प्रतिशत भले ही कम हो, लेकिन कुछ खास तरह की चीजों में चीन की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। उदाहरण के लिए, बाजार में मिलने वाला सेब का रस, लहसुन, डिब्बाबंद मैंडरिन संतरे (संतरे की एक किस्म), मछली और झींगा जैसी विशिष्ट वस्तुओं के मामले में चीन एक मुख्य और बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
वैश्विक व्यापार और कृषि नेटवर्क की वजह से आज दुनिया के एक कोने में उगाया गया खाना दूसरे कोने की रसोई तक आसानी से पहुंच जाता है। लेकिन इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर भी सतर्कता बरतनी जरूरी हो जाती है। भले ही अमेरिका जैसे देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खुद पैदा करते हैं, फिर भी प्रसंस्कृत (processed) खाद्य पदार्थों और समुद्री भोजन (seafood) के लिए वे चीन जैसे प्रमुख निर्यातकों पर कुछ हद तक निर्भर रहते हैं।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।